
बिलासपुर। दुर्ग जिले की एक सहकारी समिति में 690.70 क्विंटल धान गायब होने के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। समिति प्रबंधन का कहना था कि धान चूहों, कीड़ों, सूखेपन और खराब बोरियों की वजह से कम हुआ, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
मामला सेवा सहकारी समिति मर्यादित कुम्हली, पाटन का है। जांच में खरीद केंद्र से करीब 690.70 क्विंटल धान और 3,057 बोरियां कम पाई गईं। गायब स्टॉक की कुल कीमत लगभग 23.54 लाख रुपये बताई गई है।
सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग की शिकायत पर पुलिस ने समिति प्रबंधक अतुल वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। अधिकारियों की जांच में धान और बोरियों की कमी के लिए प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराया गया।
एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि लंबे समय तक धान खुले में पड़े रहने के कारण चूहों, कीड़ों और मौसम के असर से नुकसान हुआ। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और एफआईआर को बरकरार रखा।
