
सुकमा जिले के देवरपल्ली गांव में एक बच्ची के अंतिम संस्कार को लेकर शुक्रवार को विवाद खड़ा हो गया। धर्मांतरण कर चुके परिवार द्वारा गांव में ईसाई रीति से अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारी की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और इसका विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते विरोध के बीच परिवार गांव में अंतिम संस्कार नहीं कर सका।
ग्रामीणों का कहना था कि गांव की पारंपरिक जनजातीय मान्यताओं और सामाजिक व्यवस्था के अनुसार ऐसे अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जा सकती। ग्राम पटेल, पुजारी, पेरमा समेत समाज के अन्य लोगों ने भी अपना विरोध दर्ज कराया।
स्थिति को देखते हुए परिवार बच्ची के शव को दोरनापाल ले गया, जहां ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। घटना के दौरान जनपद सदस्य मड़कम भीमा और ग्राम पंचायत की सरपंच भीमे सोड़ी भी मौके पर मौजूद रहे।
मड़कम भीमा ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी परंपराओं और संस्कृति से है। उन्होंने सामाजिक शांति बनाए रखने, कानून का पालन करने और ऐसे मामलों में प्रशासन से समय रहते हस्तक्षेप कर संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
