
बेमेतरा: करीब चार साल पुराने इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के बहुचर्चित 14.56 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास को तमिलनाडु के तंजावुर से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरा लाया गया है। वह वर्तमान में आईओबी के क्षेत्रीय कार्यालय तंजावुर में पदस्थ था।
यह मामला वर्ष 2022 में बैंक की आंतरिक जांच के बाद सामने आया था। जांच रिपोर्ट में करोड़ों रुपये के संदिग्ध ऋण वितरण और बैंकिंग प्रक्रियाओं के उल्लंघन की पुष्टि होने पर सिटी कोतवाली में अपराध दर्ज किया गया था।
पुलिस जांच के मुताबिक, शाखा प्रबंधक ने बिचौलियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत किए। कई खातों के बीच बिना अनुमति राशि ट्रांसफर की गई, जबकि कुछ मामलों में ग्राहकों के हस्ताक्षर के बिना ही नकद निकासी भी कर ली गई। इन गड़बड़ियों से बैंक को 14 करोड़ 56 लाख 9 हजार 693 रुपये का नुकसान हुआ।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा बैंक की 180 ऋण फाइलों की जांच में हुआ। कई लोन ऐसे लोगों और संस्थाओं के नाम पर स्वीकृत मिले, जिनका अस्तित्व ही नहीं था या उनका कारोबार पहले ही बंद हो चुका था। स्वयं सहायता समूहों को नियमों से अधिक ऋण देने, फर्जी जीएसटी नंबर वाले सप्लायरों को भुगतान करने, बिना वैध मूल्यांकन और कानूनी जांच के लोन मंजूर करने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं।
इस केस में कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब पुलिस मुख्य आरोपी से पूछताछ कर फर्जी लोन नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और घोटाले की रकम के इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ रही है।
