
जांजगीर-चांपा। बलौदा विकासखंड के ग्राम पंचायत डोंगरी-काठापाली स्थित शासकीय प्राथमिक शाला काठापाली में एक शिक्षिका के कथित व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षिका पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल में खोई हुई सोने की बाली तलाशने के लिए छात्रों से ऐसा कृत्य कराया, जिसे ग्रामीण और अभिभावक अंधविश्वास से जोड़कर देख रहे हैं। मामले की शिकायत शिक्षा विभाग और पुलिस से की गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, 27 जुलाई को विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका गीता कुंभकार समय से पहले स्कूल पहुंचीं और अपनी सोने की बाली खोने की जानकारी दी। आरोप है कि इसके बाद कक्षा में मौजूद 30 से अधिक बच्चों के हाथों में लाल कपड़े और मौली से बंधा नारियल तथा चावल रखवाया गया। बच्चों से कहा गया कि यदि किसी को बाली मिली हो तो वह लौटा दे।
अभिभावकों का आरोप है कि इस दौरान बच्चों को यह भी बताया गया कि जिसने बाली अपने पास रखी होगी और वापस नहीं करेगा, उसे अनहोनी, पेट दर्द या अन्य शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस कथित बात का असर बच्चों पर पड़ा और कई छात्र डर गए।
स्कूल से घर लौटने के बाद बच्चों ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद अभिभावक और ग्रामीण स्कूल पहुंचे तथा प्रधान पाठिका से लिखित और मौखिक शिकायत की। उनका कहना है कि घटना के बाद कुछ बच्चे भय के कारण स्कूल आने से भी हिचकिचा रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शिकायत के दौरान शिक्षिका ने पहले पूरे मामले से इनकार करते हुए कहा कि बच्चे गलत बातें बता रहे हैं। हालांकि बच्चों ने स्कूल की अलमारी में रखे नारियल और चावल दिखाकर अपनी बात दोहराई, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
प्रधान पाठिका मिसेस जैन ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी शिकायत मिलने के बाद हुई। उन्होंने बताया कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर मामला होगा, क्योंकि विद्यालय बच्चों में वैज्ञानिक सोच और सकारात्मक वातावरण विकसित करने का केंद्र है।
वहीं विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षिका के विरुद्ध विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इधर ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में भी दर्ज कराई है। अब मामले में शिक्षा विभाग की जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
