
रायपुर। नेपाल घूमने गए रायपुर के पांच दोस्तों के लिए एक छोटी-सी चाय की चुस्की जिंदगी बचाने वाली साबित हुई। 26 अगस्त की सुबह मालेखू में वे कुछ देर के लिए चाय पीने रुके थे। इसी दौरान मौसम और हालात अचानक बिगड़ गए। कुछ ही देर में बाढ़ का पानी इतना तेज हो गया कि उनके आगे का पुल तक बह गया।
रायपुर के माना कैंप निवासी दिनेश ठाकुर अपने दोस्तों नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत और यतेंद्र प्रकाश के साथ 21 अगस्त को नेपाल गए थे। यात्रा के दौरान 26 अगस्त को मालेखू में उन्होंने रास्ते में थोड़ी देर रुकने का फैसला किया। यही फैसला बाद में उनके लिए बेहद अहम साबित हुआ।
आंखों के सामने बहने लगा सब कुछ
दिनेश ने बताया कि चाय पीने के दौरान अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बनने लगी। जब तक वे कुछ समझ पाते, बाढ़ का तेज बहाव आगे के पुल को अपने साथ बहा ले गया। इसके बाद वहां से निकलना मुश्किल हो गया।
पांचों दोस्तों ने अपनी आंखों के सामने गाड़ियों, घरों और दूसरे सामान को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। आपदा का यह दृश्य इतना भयावह था कि आज भी उसे याद करके वे सिहर उठते हैं।
दो रात कार में गुजारकर बचाई जान
रास्ता बंद होने के बाद दोस्तों को वहीं रुकना पड़ा। उन्होंने दो रातें कार में गुजारकर हालात सामान्य होने का इंतजार किया। इस दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासन से भी उन्हें मदद मिली।
दिनेश के मुताबिक, करीब 30 से 40 घंटे की मुश्किल परिस्थितियों के बाद वे पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन कर सके और फिर सुरक्षित वापस लौटने की कोशिश शुरू की। उनका कहना है कि सबसे बड़ी राहत यही रही कि इतने कठिन हालात के बावजूद सभी दोस्त सकुशल घर लौट आए।
राखी ने बना दिया सफर को भावुक
नेपाल में फंसे होने के दौरान रक्षाबंधन भी आया। उस वक्त घरवालों को पहले ही बता दिया गया था कि हालात ठीक नहीं हैं और समय पर वापस लौटना संभव नहीं होगा। इसी बीच वहां मौजूद महिला सुरक्षाकर्मियों ने दोस्तों को राखी बांधी।
दिनेश के लिए यह पल बेहद भावुक रहा। एक तरफ चारों ओर बाढ़ और तबाही का डर था, तो दूसरी तरफ अनजान जगह पर मिले इस अपनापन ने उन्हें भावुक कर दिया।
परिवार से बना रहा संपर्क
दिनेश ने बताया कि मुश्किल हालात के बावजूद इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद नहीं हुई थी। इससे वे अपने परिवार और दोस्तों से संपर्क में बने रहे। साथ ही सरकार और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहने से उन्हें आगे का रास्ता तय करने में मदद मिली।
नेपाल की इस यात्रा में पांचों दोस्तों ने जिस तबाही को अपनी आंखों से देखा, वह उनके लिए जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बन गया। और इस पूरी घटना में सबसे बड़ा संयोग यही रहा कि कुछ मिनट के लिए चाय पीने का फैसला उन्हें उस रास्ते से दूर कर गया, जहां कुछ ही देर बाद बाढ़ ने सब कुछ बदल दिया।
