
रायपुर। खुदाई में मिला पुराना सोना बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का रायपुर पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह के सदस्य पहले असली सोने का छोटा टुकड़ा दिखाकर लोगों का भरोसा जीतते थे और फिर पीतल के हार को सोना बताकर बेच देते थे। पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में 22.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए उत्तर प्रदेश के तीन आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में शंभू राय (36), गीता गुजराती (40) और शांति गुजराती (35) शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने रायपुर के अलावा देश के कई राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है। पूछताछ में आरोपियों ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ठगी की घटनाओं की बात स्वीकार की है।
पहले भरोसा जीता, फिर नकली सोना थमाया
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए खुद को दिहाड़ी मजदूर या खुदाई करने वाला बताते थे। वे लोगों से कहते थे कि उन्हें खुदाई के दौरान पुराने सोने के सिक्के और आभूषण मिले हैं।
ठगी का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी पीतल के हार को सोने का बताकर दिखाते थे। जब कोई व्यक्ति उसकी जांच कराने की बात करता तो आरोपी उसी हार से पहले से तैयार रखा गया असली सोने का छोटा टुकड़ा तोड़कर दे देते थे। जांच में सैंपल असली निकलने के बाद पीड़ित को पूरे हार पर भरोसा हो जाता था। इसके बाद आरोपी आर्थिक परेशानी, शादी जैसे कारण बताकर कम कीमत में हार बेचने का झांसा देते और लाखों रुपये लेकर फरार हो जाते थे।
महेश कानस्कर से 2.50 लाख की ठगी
न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में प्रार्थी महेश कानस्कर ने शिकायत दर्ज कराई थी। 18 जनवरी 2026 को कलर्स मॉल के पास एक व्यक्ति ने खुद को दिहाड़ी मजदूर बताते हुए खुदाई में मिले पुराने सिक्के और सोने का हार होने की बात कही।
कुछ दिनों बाद आरोपी अपनी कथित मां के साथ दोबारा मिला और हार का छोटा टुकड़ा जांच के लिए दिया, जो असली सोना निकला। भरोसा होने के बाद 5 फरवरी 2026 को पचपेड़ी नाका में महेश कानस्कर ने आरोपियों को 2.50 लाख रुपये नकद देकर हार खरीद लिया। बाद में जांच कराने पर हार नकली और तांबे का निकला।
यश मोटवानी से 10 लाख की ठगी
तेलीबांधा थाना क्षेत्र में प्रार्थी यश मोटवानी को आरोपियों ने निशाना बनाया। पुलिस के अनुसार, 1 जून 2026 को उसकी मोबाइल एसेसरीज दुकान पर एक व्यक्ति आया और पुराने सिक्के दिखाकर बातचीत शुरू की। बाद में उसने खुदाई में मिले सोने के हार की बात कही।
आरोपी ने हार का टुकड़ा जांच के लिए दिया, जो असली सोना निकला। इसके बाद हार का सौदा 15 लाख रुपये में तय हुआ, लेकिन बाद में 10 लाख रुपये में सौदा कर लिया गया। 3 जून 2026 को जोरा ओवरब्रिज के पास यश मोटवानी ने 10 लाख रुपये देकर हार खरीदा, लेकिन बाद में जांच में पूरा हार पीतल का निकला।
धवल बडोदरिया को लगाया 10 लाख का चूना
डी.डी. नगर थाना क्षेत्र में प्रार्थी धवल बडोदरिया से भी इसी तरीके से ठगी की गई। पुलिस के मुताबिक, उसकी पहचान राजेश प्रजापति नामक व्यक्ति से हुई थी। आरोपी ने खुदाई में मिला करीब 2 किलो वजन का सोने का हार बताकर उसे बेचने की पेशकश की।
हार का सैंपल जांच में असली निकलने के बाद धवल बडोदरिया ने 23 जून 2026 को रायपुरा चौक के पास 10 लाख रुपये देकर हार खरीद लिया। बाद में सराफा बाजार में जांच कराने पर हार नकली निकला।
मुंबई से पकड़े गए आरोपी, दिल्ली से लाते थे नकली आभूषण
पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद टीम ने मुंबई पहुंचकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में पता चला कि आरोपी नकली पीतल के आभूषण दिल्ली के करोल बाग से लाते थे। गिरोह में शामिल महिलाएं अलग-अलग घटनाओं में आरोपी की मां या रिश्तेदार बनकर साथ जाती थीं, जिससे पीड़ितों को भरोसा हो सके।
12 लाख का सामान जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 लाख रुपये नकद, 12 चांदी के सिक्के, पीतल के आभूषण, वारदात में इस्तेमाल चार मोबाइल फोन और मुख्य आरोपी के पास से चार फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और दूसरे राज्यों में की गई ठगी की घटनाओं की जांच कर रही है।
