
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते की शर्तों का दावा किए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान ने ट्रंप के बयान को सिरे से खारिज करते हुए इसे “सच और झूठ का मिश्रण” बताया है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने कहा कि ट्रंप ने जिन शर्तों का जिक्र किया है, वे तेहरान के सामने मौजूद वास्तविक मसौदे से मेल नहीं खातीं। फार्स न्यूज एजेंसी ने भी ट्रंप के दावों को मनगढ़ंत करार दिया।
समझौते पर अभी अंतिम फैसला नहीं
ईरान का कहना है कि प्रस्तावित समझौता अभी समीक्षा के अंतिम चरण में है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। तेहरान ने ट्रंप के बयान को “काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश” बताया।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका के साथ आगे की बातचीत तभी संभव होगी जब समझौता ईरान की शर्तों और अमेरिका के प्रति उसके गहरे अविश्वास को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए। साथ ही प्रतिबंधों में राहत भी जरूरी होगी।
ट्रंप ने क्या कहा था?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया था कि ईरान के साथ युद्धविराम और शांति समझौते की शुरुआती शर्तें तय हो चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी देनी होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान की परमाणु गतिविधियों को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा और क्षेत्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया जाएगा।
ईरान ने शर्तों पर क्या जवाब दिया?
ईरान ने साफ किया कि उसने बिना किसी शर्त के होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति नहीं दी है। हालांकि समुद्री सुरक्षा, निगरानी और जहाजों के निरीक्षण जैसे कदम उठाने पर विचार किया जा सकता है।
साथ ही ईरान ने अपने परमाणु सामग्री को नष्ट करने संबंधी दावे को भी खारिज कर दिया और कहा कि मसौदे में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है।
12 अरब डॉलर की संपत्ति सबसे बड़ा मुद्दा
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, समझौते का सबसे अहम हिस्सा विदेशों में फंसी ईरान की करीब 12 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करना है। जब तक यह राशि जारी नहीं होती, तब तक तेहरान बातचीत के अगले चरण में आगे नहीं बढ़ेगा। इसके अलावा लेबनान में पूर्ण युद्धविराम भी समझौते का महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
