

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ गए हैं। उन्होंने वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 60-70 साल से अधिक उम्र के लोगों को राजनीति और सामाजिक आंदोलनों से रिटायर होकर युवाओं को जिम्मेदारी सौंप देनी चाहिए।
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे, जहां कथित पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह अन्ना हजारे से मुलाकात करेंगे। जवाब में उन्होंने कहा कि अब देश के भविष्य से जुड़े फैसले युवाओं को लेने चाहिए और बुजुर्ग नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को पीछे हट जाना चाहिए।
दीपके ने कहा कि युवाओं को नेतृत्व करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “कब तक बुड्ढे लोग फैसला करते रहेंगे।” उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके बयान की आलोचना की। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि यदि दीपके बुजुर्गों के नेतृत्व के खिलाफ हैं, तो आंदोलन में सोनम वांगचुक की भूमिका पर क्या कहेंगे। लोगों ने इसे विरोधाभासी बताते हुए उनकी टिप्पणी पर सवाल खड़े किए।
इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 10वें दिन में पहुंच गया है। स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, उनका वजन करीब 6.9 किलोग्राम कम हुआ है। डॉक्टरों ने बताया कि उनका रक्तचाप 107/67 mmHg और ब्लड शुगर 72 mg/dL दर्ज किया गया है। फिलहाल आंदोलन जारी है और इस पूरे विवाद पर लोगों की नजर बनी हुई है।






