
जगदलपुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन सुरक्षा व्यवस्था को नदी तक विस्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। जंगल के ऐसे हिस्से, जहां सड़क से पहुंचना मुश्किल है, वहां अब वनकर्मी बांस की नावों के जरिए गश्त कर सकेंगे।
नदी पेट्रोलिंग का मुख्य उद्देश्य शिकार और वन संपदा से जुड़ी अवैध गतिविधियों पर नजर रखना है। गश्त के दौरान अवैध मछली पकड़ने, लकड़ी की तस्करी, शिकार और संदिग्ध लोगों की आवाजाही की निगरानी की जाएगी।
सड़क से मुश्किल इलाकों तक पहुंचेगा अमला
इंद्रावती रिजर्व में कई नदी और जलस्रोत जंगल के अंदरूनी हिस्सों से होकर गुजरते हैं। इन इलाकों में हर जगह वाहन से पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में नाव के जरिए पेट्रोलिंग करने से वन अमले को ज्यादा क्षेत्र कवर करने में मदद मिल सकती है।
नदी के किनारे होने वाली गतिविधियों के साथ आसपास के जंगल पर भी नजर रखी जाएगी। किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर वनकर्मी मौके तक पहुंच सकेंगे।
तीन राज्यों की सीमा से जुड़ा है रिजर्व
इंद्रावती टाइगर रिजर्व का क्षेत्र महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमाओं के करीब है। सीमावर्ती इलाका होने के कारण यहां नदी मार्गों की निगरानी को भी अहम माना जा रहा है।
वन विभाग पड़ोसी राज्यों में इस्तेमाल हो रहे नदी पेट्रोलिंग के तरीके का अध्ययन कर इसी तरह की व्यवस्था यहां लागू करने की तैयारी में है।
स्थानीय संसाधन से तैयार होंगी नावें
रिजर्व में पेट्रोलिंग के लिए बांस से नाव तैयार करने की योजना है। इससे वन विभाग को नदी क्षेत्र में गश्त के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा।
क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि नदी मार्ग से निगरानी बढ़ाने के लिए बांस की नावों के उपयोग की तैयारी की जा रही है। इसके लिए डीएफओ, एसडीओ, रेंजर और मैदानी कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
नदी पेट्रोलिंग शुरू होने के बाद रिजर्व के जलक्षेत्र और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में वन अमले की मौजूदगी बढ़ने की उम्मीद है।
