CG Registry New Rule: छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए रजिस्ट्री कानून में ऐसा संशोधन किया है, जिसका सीधा लाभ अब गोद ली हुई पुत्रियों को भी मिलेगा। अब गोद ली हुई पुत्री भी उसी तरह संपत्ति पर हकदार होगी जैसे गोद लिया हुआ पुत्र। यह फैसला छत्तीसगढ़ रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 में संशोधन के बाद लागू हुआ है।
सोमवार को आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने विभाग के दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियां बताते हुए इस बड़े बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के पुराने कानून में सुधार करना बेहद जरूरी था, ताकि समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित हो सके।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़े बदलाव – नागरिकों को मिलेंगी स्मार्ट सुविधाएं
स्मार्ट पंजीयन कार्यालय
मंत्री चौधरी ने बताया कि राज्य में वीज़ा ऑफिस की तरह 10 स्मार्ट पंजीयन कार्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। ये पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर तैयार हो रहे हैं और नागरिकों को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करेंगे।
नवा रायपुर का नया पंजीयन कार्यालय अक्टूबर 2025 से मॉडल ऑफिस के रूप में शुरू हो चुका है।
दो साल में शुरू की गई महत्वपूर्ण सेवाएं
1. ई-पंजीयन और एनजीडीआरएस सॉफ्टवेयर
पूरी पंजीयन प्रक्रिया अब लगभग पेपरलेस
ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट
वैल्यूएशन सिस्टम
स्वतः दस्तावेज अपलोड सुविधा
नागरिकों को बिना दौड़धूप के रजिस्ट्री करने में राहत
2. सुगम मोबाइल ऐप
पहले कई मामलों में गलत जमीन दिखाकर दूसरी जमीन की रजिस्ट्री कर दी जाती थी।
अब सुगम ऐप से—
संपत्ति के अक्षांश–देशांतर
तीन कोणों से फोटो
ऑनलाइन सिस्टम से जुड़े रहते हैं।
इससे संपत्ति की पहचान सुरक्षित और स्थायी हो जाती है।
माय डीड मॉड्यूल – पूरी तरह पेपरलेस रजिस्ट्री
इस सुविधा से पक्षकार अपने डॉक्यूमेंट को डिजिटल फॉर्मेट में तैयार कर पंजीयन के लिए ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं।
इसके साथ ही जमीन में लगे वृक्षों का मूल्यांकन शुल्क भी खत्म कर दिया गया है, जिससे आम नागरिकों को राहत मिली है।
पुराने रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन – 34 लाख दस्तावेज स्कैन
CG Registry New Rule के तहत पिछले 30 साल के रिकॉर्ड को डिजिटल किया गया है।
अब नागरिक—
जमीन खरीदने से पहले उसका पूरा इतिहास देख सकते हैं
पुरानी रजिस्ट्री की सर्टिफाइड कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं
यह पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सतर्कता प्रकोष्ठ का गठन – 24 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी
राजस्व बढ़ाने और अपवंचन रोकने के लिए विभाग ने सतर्कता प्रकोष्ठ का गठन किया है।
अब तक इस इकाई ने लगभग 24 करोड़ रुपए के अपवंचन के प्रकरण पकड़े हैं, जो विभाग की प्रभावी कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
