भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी युवराज सिंह ने अपने संन्यास को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि करियर के आखिरी दौर में क्रिकेट खेलना उनके लिए बोझ बन गया था। उन्हें न तो खेल में पहले जैसा आनंद मिल रहा था और न ही टीम में वह सम्मान, जिसके वे हकदार थे। इसी वजह से उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया।
युवराज ने क्या कहा?
सानिया मिर्जा के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान युवराज सिंह ने कहा,
“मुझे क्रिकेट खेलना अच्छा नहीं लग रहा था। मैं खुद से सवाल करने लगा था कि जब खेल में मजा ही नहीं आ रहा तो मैं क्यों खेल रहा हूं? मुझे न समर्थन मिला और न ही सम्मान। जब ये दोनों चीजें नहीं थीं, तो आगे खेलने का कोई मतलब नहीं लगा।”
उन्होंने आगे कहा कि क्रिकेट ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और उन्होंने भी देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।
क्रिकेट से आनंद खत्म हो गया था
युवराज ने बताया कि एक समय ऐसा आ गया था जब वे मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके थे।
वे खुद से पूछने लगे थे कि वे आखिर किसके लिए खेल रहे हैं और क्या साबित करना चाहते हैं।
जिस दिन उन्होंने संन्यास का फैसला लिया, उसी दिन उन्हें अंदर से सुकून मिला और लगा कि वे फिर से खुद को पहचान पाए हैं।
पुराने दिनों को लेकर क्या बोले युवराज?
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए युवराज ने कहा कि जब वे 13–14 साल के थे, तब नवजोत सिंह सिद्धू ने उन्हें लेकर एक टिप्पणी की थी।
युवराज का मानना है कि उस समय सिद्धू के पास उन्हें ठीक से परखने का समय नहीं था और उनके पिता ने उस बात को दिल पर ले लिया। उस उम्र में वे खुद भी क्रिकेट को समझने की कोशिश कर रहे थे।
ऐसा रहा युवराज सिंह का क्रिकेट करियर
13 साल की उम्र में पंजाब अंडर-16 टीम से डेब्यू
2000 अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत को जिताने में अहम भूमिका
टूर्नामेंट के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे
10 जून 2019 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा
अंतरराष्ट्रीय करियर आंकड़े
टेस्ट: 40 मैच
वनडे: 304 मैच
टी-20: 58 मैच
