

वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप ने भारत के कच्चे तेल आयात को लेकर नई चिंता बढ़ा दी है। हाल के महीनों में मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ाई थी। लेकिन भूकंप के बाद बिजली कटौती, सड़क और बंदरगाहों पर असर पड़ने से तेल की सप्लाई धीमी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला अब भारत के लिए कच्चे तेल का अहम स्रोत बन चुका है। हालांकि तेल निर्यात टर्मिनलों को बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन परिवहन और शिपिंग में देरी होने से तेल की ढुलाई प्रभावित हो सकती है। इससे जहाजों का किराया, बीमा और अन्य खर्च बढ़ने की आशंका है।
अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी तय नहीं मानी जा रही है। लेकिन अगर सप्लाई में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो भारतीय रिफाइनरियों को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे लागत बढ़ सकती है और इसका असर ईंधन की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
भूकंप का असर केवल तेल व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश ने भी वेनेजुएला की तेल परियोजनाओं में निवेश किया है। यदि वहां उत्पादन या निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारत के आर्थिक हितों पर भी असर पड़ सकता है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच खनन, फार्मा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश को लेकर चर्चा हुई थी। लेकिन मौजूदा आपदा के कारण इन योजनाओं की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।




