
भाजपा ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। पार्टी का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राजस्थान में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
राजे लंबे समय से राजस्थान में भाजपा की प्रमुख नेताओं में शामिल रही हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2003 और 2013 के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। 2003 में भाजपा को 120 सीटें मिली थीं, जबकि 2013 में पार्टी ने 163 सीटों के साथ सरकार बनाई थी।
इसके बाद राजस्थान की राजनीति में भाजपा ने नेतृत्व को लेकर बदलाव किया। 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जीत दर्ज करने के बाद भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया। इस बदलाव के बाद राजे की राज्य की सक्रिय राजनीति में भूमिका पहले के मुकाबले कम दिखाई दी।
2023 के चुनाव में भाजपा ने कुल 115 सीटें जीती थीं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान में पार्टी का प्रदर्शन पिछली बार जैसा नहीं रहा। 2019 में सभी 25 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार 14 सीटें ही जीत सकी और 11 सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा।

इस चुनाव में वसुंधरा राजे की सक्रियता भी सीमित रही। उन्होंने झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र में प्रचार किया, जहां से उनके बेटे दुष्यंत सिंह भाजपा के उम्मीदवार थे। चुनाव नतीजों ने राजस्थान में भाजपा की पिछली चुनावी स्थिति में बदलाव का संकेत दिया।
अब भाजपा के सामने 2028 का विधानसभा चुनाव है। भजन लाल शर्मा सरकार के कार्यकाल के बीच पार्टी को अगले चुनाव में अपनी मौजूदा सरकार के पक्ष में माहौल बनाए रखने की चुनौती होगी। इसी बीच राजे को राष्ट्रीय संगठन में अहम पद मिलना राजस्थान की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
राजे का अनुभव और राजस्थान में उनकी पहचान भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी के लिए यह फैसला पुराने और प्रभावशाली नेतृत्व को साथ रखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।
हालांकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने को सीधे 2028 में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि भाजपा ने राजे को राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी देकर यह संकेत दिया है कि पार्टी में उनका राजनीतिक महत्व अभी खत्म नहीं हुआ है।
