

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में चुनाव सुरक्षा को लेकर कई बड़े दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने 2020 के चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा हासिल किया और इसका इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की। ट्रंप ने FBI और CIA पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसियों ने इस मामले की अहम जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
ट्रंप के मुताबिक चोरी किए गए डेटा में वोटरों के नाम, पते, फोन नंबर और उनकी राजनीतिक पसंद जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल थी। उन्होंने दावा किया कि चीन ने इस डेटा के इस्तेमाल के लिए विशेष व्यवस्था भी बनाई थी।
राष्ट्रपति ने कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी की समीक्षा में करीब 2.78 लाख गैर-अमेरिकी मतदाता पंजीकृत पाए गए। उन्होंने चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए ‘सेफ अमेरिका एक्ट’ लागू करने की मांग की और वोटर आईडी को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया।
वोटिंग मशीनों पर भी उठाए सवाल
ट्रंप ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और डाक से भेजे जाने वाले मतपत्रों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि अमेरिका की चुनावी प्रणाली साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील है और चीन, रूस, ईरान तथा उत्तर कोरिया जैसे देश इसका फायदा उठा सकते हैं।
सीमा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी बोले
अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की सीमाएं पहले से अधिक सुरक्षित हैं और पिछले 14 महीनों में कोई अवैध प्रवासी देश में प्रवेश नहीं कर पाया। उन्होंने यह भी कहा कि अपराध में कमी आई है और उनकी नीतियों के कारण दवाओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
मीडिया और विदेश नीति पर भी साधा निशाना
ट्रंप ने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने उनके संबोधन का प्रसारण नहीं किया ताकि चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सामने न आएं। वहीं, ईरान और वेनेजुएला का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका को जल्द बड़े नतीजे देखने को मिलेंगे।




