
नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन में आखिरकार वह सहमति बन गई, जिस पर कई दिनों से बातचीत चल रही थी। सदस्य देशों ने ‘नई दिल्ली घोषणा’ को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक, घोषणा पत्र को सभी देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
इस घोषणा की खास बात यह है कि इसमें किसी देश का नाम लिए बिना आक्रामकता और संघर्ष की निंदा की गई है। BRICS ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के रास्ते से होना चाहिए।
टैरिफ को लेकर भी BRICS ने जताई नाराजगी
घोषणा पत्र में एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ प्रतिबंधों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई गई है। BRICS का कहना है कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं और WTO के नियमों के खिलाफ जाते हैं।
समूह ने दबाव बनाने वाले एकतरफा कदमों का विरोध करने के साथ परमाणु खतरे और नए संघर्षों की आशंका पर भी चिंता जाहिर की।
मोदी ने बताया BRICS का रुख
सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ बनाया गया मंच नहीं है। इसका उद्देश्य सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में लोगों और मानवता को केंद्र में रखा गया है।
मोदी ने BRICS के लिए अगले 20 वर्षों का महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत बताई। इसके अलावा उन्होंने BRICS Community Continuity and Implementation Mechanism और नाविकों की सुरक्षा से जुड़े प्रस्ताव भी रखे।
पहलगाम हमले पर भी आया जिक्र
घोषणा पत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की गई। BRICS देशों ने आतंकवाद के हर रूप को आपराधिक और अनुचित बताया।
सदस्य देशों ने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही रोकने, आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग पर कार्रवाई करने और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मई में नहीं बनी थी बात, इस बार कैसे बनी सहमति?
इस घोषणा को मंजूरी मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मई में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति नहीं बन सकी थी।
इस बार सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया को लेकर अलग-अलग देशों के रुख थे। ईरान चाहता था कि अमेरिकी-इजरायली हमलों और पश्चिमी प्रतिबंधों की खुलकर निंदा हो। दूसरी ओर UAE चाहता था कि खाड़ी क्षेत्र और वहां की सुविधाओं पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का भी उल्लेख किया जाए।
मतभेद दूर करने के लिए भारतीय अधिकारियों ने रूस, ब्राजील और मिस्र के साथ मिलकर दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बातचीत की। आखिरकार ऐसी भाषा पर सहमति बनी, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सके और संयुक्त घोषणा जारी हो गई।
