
नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को Anti-Paper Leak Bill 2026 पेश किया गया। यह बिल केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में रखा। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे प्रह्लाद जोशी की जगह यह बिल जितेंद्र सिंह ने क्यों पेश किया। इसकी वजह सरकार की जिम्मेदारियों के बंटवारे से जुड़ी है।
जितेंद्र सिंह ने ही क्यों पेश किया बिल?
यह कानून सिर्फ NEET, JEE और CUET जैसी परीक्षाओं के लिए नहीं है। इसका दायरा UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग और दूसरी केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं तक है। इन परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास होती है, जिसके मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह हैं। यही वजह है कि 2024 में भी मूल Anti-Paper Leak Bill उन्होंने ही संसद में पेश किया था और अब संशोधन विधेयक भी वही लेकर आए हैं।
प्रह्लाद जोशी ने क्यों नहीं रखा बिल?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। जिस दिन यह बिल पेश हुआ, उस दिन लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सवालों और दूसरे संसदीय कामकाज की जिम्मेदारी उनके पास थी। इसलिए सरकार ने बिल पेश करने की जिम्मेदारी डॉ. जितेंद्र सिंह को दी।
पेपर लीक पर सरकार सख्त
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों पर सख्ती से रोक लगाना है। इसके लिए कानून को और मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से कराई जा सकें।
हाई पावर टास्क फोर्स भी बनी
पेपर लीक के मामलों पर कार्रवाई तेज करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाई है। साथ ही ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
हंगामे के कारण नहीं हो सकी चर्चा
बिल पेश होने के बाद विपक्ष ने छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर पहले चर्चा की मांग की। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी और Anti-Paper Leak Bill पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी।
उधर, शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, “I am a street fighter, not an AC room activist.” उनका यह बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
