
बेमेतरा। शिक्षक दिवस के दिन बेमेतरा जिले की दो शिक्षिकाओं को उनके शिक्षा क्षेत्र में किए गए नवाचारों के लिए बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है। आंचल वर्मा और शीतल बैस का चयन वर्ष 2026 के राज्य शिक्षक अलंकरण पुरस्कार के लिए किया गया है। दोनों को 5 सितंबर को रायपुर के लोक भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
आंचल वर्मा बेमेतरा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला कंतेली में शिक्षिका हैं, जबकि शीतल बैस नवागढ़ विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला मगरघटा में कार्यरत हैं। दोनों शिक्षिकाओं ने बच्चों की पढ़ाई को आसान और रुचिकर बनाने के लिए कई तरह के प्रयोग किए हैं।
पढ़ाई को खेल से जोड़कर तैयार किए TLM
आंचल वर्मा ने हिंदी, अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षण सामग्री तैयार की। इनमें उपसर्ग-प्रत्यय, विलोम शब्द, कैलेंडर चक्र, भूल-भुलैया और कैरम बोर्ड आधारित TLM शामिल हैं।
उनका कैरम बोर्ड आधारित शिक्षण मॉडल राज्य स्तरीय ‘कबाड़ से जुगाड़’ पुस्तक में भी जगह बना चुका है। उन्होंने इन प्रयोगों को डिजिटल माध्यमों के जरिए दूसरे शिक्षकों और विद्यार्थियों तक भी पहुंचाया।
कोरोना के दौरान भी बच्चों से जुड़ी रहीं
कोरोना महामारी के समय जब स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित हुई, तब आंचल वर्मा ने ‘पढ़ई तुहर द्वार’ के तहत मोहल्ला कक्षाएं शुरू कीं। दीवार लेखन के माध्यम से भी बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखा। ‘अंगना मा शिक्षा’ सहित कई शैक्षणिक अभियानों में उनकी भागीदारी रही।
उनके काम के लिए उन्हें मुख्यमंत्री शिक्षा दूत पुरस्कार 2020 समेत जिला और सामाजिक संस्थाओं के कई सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्हें FLN वॉरियर्स पुरस्कार भी मिला।
शीतल बैस ने भी बनाए पढ़ाने के नए तरीके
शीतल बैस ने भी कोरोना काल में ऑनलाइन और मोहल्ला कक्षाओं के जरिए बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। उनके शैक्षणिक काम को छत्तीसगढ़ के ‘हमारे नायक’ कार्यक्रम में दो बार जगह मिली।
कक्षा में उन्होंने खेल, कहानी, कविता, गीत, प्रोजेक्ट, योग, खिलौना आधारित गतिविधियों और ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसे तरीकों को पढ़ाई से जोड़ा। टीएलएम प्रदर्शनी और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
छत्तीसगढ़ी भाषा और प्रशिक्षण में भी योगदान
शीतल बैस ने एससीईआरटी रायपुर के ‘रूम टू रीड’ कार्यक्रम में हिंदी से छत्तीसगढ़ी भाषा में सामग्री और कहानी के अनुवाद में योगदान दिया। वे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मास्टर ट्रेनर के रूप में भी काम कर चुकी हैं।
बहुभाषी शिक्षण कार्यक्रम में भागीदारी के साथ उन्होंने राज्य स्रोत व्यक्ति के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है। पुणे में आयोजित G-20 कार्यक्रम में भी उनकी सहभागिता रही।
5 सितंबर को मिलेगा सम्मान
शिक्षण में लगातार किए गए इन नवाचारों और बच्चों की शिक्षा के लिए किए गए कार्यों को देखते हुए दोनों शिक्षिकाओं का चयन राज्य शिक्षक अलंकरण के लिए किया गया है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर रायपुर के लोक भवन में होने वाले समारोह में आंचल वर्मा और शीतल बैस को सम्मानित किया जाएगा।
