
रायपुर। झीरम घाटी हमले की जांच को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। NIA की जांच पर बघेल की आपत्तियों के बाद CM साय ने सीधे उनके पिछले कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
साय ने कहा कि भूपेश बघेल लगभग पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे। अगर उनके पास झीरम मामले से जुड़े प्रमाण थे, तो सरकार में रहते हुए उन प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर मामलों में केवल आरोप लगाने के बजाय ठोस कदम उठाना जरूरी होता है।
बघेल ने NIA की जांच पर क्या कहा?
कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने के लिए बस्तर पहुंचे भूपेश बघेल ने झीरम मामले की जांच को लेकर NIA पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि FIR में जिन लोगों के नाम दर्ज थे, उनसे जरूरी पूछताछ नहीं की गई।
बघेल ने यह भी दावा किया था कि हमले के वक्त घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान पर्याप्त संख्या में दर्ज नहीं किए गए। उनके मुताबिक जांच उन लोगों तक भी नहीं पहुंची, जिनकी भूमिका हमले की साजिश में होने की आशंका थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की भाजपा सरकार पर भी इस मामले को आगे नहीं बढ़ाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सरकार के रवैये से ऐसा लगता है कि मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।
झीरम की सच्चाई सामने लाने की बात
CM साय ने झीरम घाटी हमले को कांग्रेस के लिए बेहद दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की जान गई थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक घटना की वास्तविक सच्चाई सामने आना जरूरी है और इसके लिए प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
सुरक्षा को लेकर भी आया CM का बयान
माओवाद के खिलाफ अभियान में सफलता के बाद जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में संभावित बदलाव पर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की समीक्षा के लिए कमेटी बनी हुई है।
किसी व्यक्ति को कितनी सुरक्षा दी जानी है, इसका फैसला उसकी सुरक्षा जरूरतों के आकलन और कमेटी की सिफारिश के आधार पर किया जाता है।
छत्तीसगढ़ में निवेश बढ़ाने पर सरकार का जोर
CM साय ने राज्य में निवेश को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है और निवेशक यहां उत्पादन शुरू करने में रुचि दिखा रहे हैं। कमर्शियल माइनिंग के क्षेत्र में निवेशकों को तय अवधि तक जरूरी सुविधाएं और छूट दी जा रही हैं।
सरकार का जोर उद्योग और खनन गतिविधियों को बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश बढ़ने से राज्य को आर्थिक फायदा होगा और स्थानीय लोगों, ग्रामीणों व आदिवासी आबादी के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
झीरम मामले में बघेल के आरोप और साय के जवाब के बाद यह मुद्दा एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
