
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु सरकार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के फैसले को रद्द कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर अंतरिम आदेश दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे सकती है, तो रोजगार देने पर रोक क्यों होनी चाहिए?
कोर्ट ने कहा कि भगदड़ में लोगों की मौत हुई है। अगर किसी परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य मारा गया हो, तो क्या उसके बेटे या बेटी को नौकरी नहीं दी जानी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव समेत अन्य पक्षों को नोटिस भी जारी किया है।
मद्रास हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
मद्रास हाई कोर्ट ने 27 जुलाई को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि इस तरह सरकारी नौकरी देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के प्रावधानों के खिलाफ है।
दरअसल, मुख्यमंत्री विजय ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के 32 वारिसों को अनुकंपा नियुक्ति के पत्र सौंपे थे। हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस फैसले पर सवाल उठे थे। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से इन परिवारों को नौकरी मिलने का रास्ता फिर खुल गया है।
