
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हाल ही में CJP के प्रदर्शन और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिवार पहली बार मीडिया के सामने आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिजनों ने उस दिन की दर्दनाक घटनाओं को याद करते हुए भावुक आपबीती सुनाई और पुलिसकर्मियों के लिए न्याय की मांग की।
घायल दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने बताया कि 25 जुलाई को ड्यूटी के दौरान उनके पिता पर भीड़ ने हमला कर दिया। उनके अनुसार, बैरिकेड्स पर तैनाती के दौरान भीड़ ने उन्हें खींच लिया और गंभीर रूप से पीटा। हमले के बाद वे करीब चार घंटे तक बेहोश रहे। जब साथी पुलिसकर्मी उन्हें बचाकर घर लाए, तब उनकी पूरी वर्दी खून से सनी हुई थी।
बेटी ने कहा कि उनके पिता पहले भारतीय नौसेना में मरीन कमांडो रह चुके हैं और 15 वर्षों तक देश की सेवा कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनके पिता को ही गलत तरीके से आरोपी की तरह पेश किया गया, जबकि वे अस्पताल में गंभीर हालत में थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पुलिस के एक एसीपी की पत्नी अवनीत कौर भी मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई की रात जब उनके पति घायल अवस्था में घर पहुंचे, तो उनकी हालत देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया। उन्होंने कहा कि उनकी दो साल की बेटी भी अपने पिता को उस स्थिति में देखकर डर गई थी।
अवनीत कौर ने कहा कि लोग अक्सर भूल जाते हैं कि पुलिस की वर्दी के पीछे भी एक परिवार होता है, जो हर दिन अपने प्रियजन के सुरक्षित घर लौटने का इंतजार करता है।
घायल SI की बेटी ने यह भी दावा किया कि घटना के अगले दिन हमले के आरोपियों ने अपने बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बाद उन्होंने भी अन्य पुलिस परिवारों के साथ मिलकर न्याय की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया। उनका कहना है कि उन्हें भरोसा है कि कानून सभी नागरिकों को समान न्याय देगा।
