

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया है कि बिना ठोस आश्वासन के वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी तीन में से किसी एक शर्त के पूरी होने पर ही वह 20 जुलाई को अनशन समाप्त करेंगे।
वांगचुक की पहली मांग है कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था की कमियों और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे। दूसरी मांग में उन्होंने कहा कि यदि उन्हें संसद तक जाने दिया जाता है और वहां अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसद शिक्षा सुधार का मुद्दा संसद में उठाने का भरोसा देते हैं, तो वह अनशन तोड़ देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर स्वास्थ्य कारणों से वह संसद नहीं पहुंच पाते, तो सांसद सफदरजंग अस्पताल आकर उन्हें लिखित या सार्वजनिक आश्वासन दें कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा कराई जाएगी।
वांगचुक ने दावा किया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है और उनकी आवाजाही व बातचीत पर भी रोक लगाई गई है। वह 28 जून से शिक्षा सुधार और पेपर लीक मामलों में जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं।
इधर, CJP ने मानसून सत्र के पहले दिन ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया है। इसे देखते हुए संसद परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।





