रायपुर: विश्वविद्यालय में दो रजिस्ट्रार का विवाद: ABVP का हंगामा, पूछा- ‘असली’ कौन? दोनों नेम प्लेट हटवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ के महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में एक ही समय पर दो कुलसचिव (Registrar) के कार्यरत होने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रशासनिक उलझन के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जोरदार प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

ABVP का कहना है कि विश्वविद्यालय में दो-दो कुलसचिवों की मौजूदगी से न सिर्फ प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनी हुई है, बल्कि शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। परिषद ने कुलपति से इस पूरे मामले पर पांच अहम बिंदुओं पर तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

आधिकारिक ई-मेल के इस्तेमाल पर सवाल

ABVP के अनुसार, नवपदस्थ कुलसचिव आर.एल. खरे ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक रजिस्ट्रार ई-मेल आईडी का उपयोग करते हुए सभी विभागों को पदभार ग्रहण करने का संदेश भेजा। जबकि शासन द्वारा विधिवत नियुक्त कुलसचिव यशवंत केराम पहले से ही पदस्थ हैं। परिषद ने सवाल उठाया कि वर्तमान कुलसचिव के रहते किसी अन्य व्यक्ति को आधिकारिक ई-मेल आईडी के उपयोग की अनुमति कैसे दी गई।

केबिन और नेम प्लेट को लेकर विवाद

विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि आर.एल. खरे द्वारा कुलसचिव यशवंत केराम के केबिन पर जबरन कब्जा कर उनका नाम-पट्ट हटाकर स्वयं का नेम प्लेट लगाया गया। ABVP के हस्तक्षेप के बाद दोनों नेम प्लेट हटवाई गईं और यशवंत केराम को पुनः उनके मूल केबिन में बैठाया गया।

ABVP ने उठाए पांच बड़े सवाल

आंदोलन के दौरान ABVP ने कुलपति से जिन बिंदुओं पर जवाब मांगा, उनमें शामिल हैं—

वर्तमान में विश्वविद्यालय का वैध कुलसचिव कौन है?

किस कुलसचिव के आदेश और हस्ताक्षर मान्य होंगे?

आधिकारिक रजिस्ट्रार ई-मेल आईडी का उपयोग किस आधार पर किया गया?

केबिन और नेम प्लेट बदलने के लिए जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी कौन है?

अब तक इस मुद्दे पर राजभवन या छत्तीसगढ़ शासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश क्यों नहीं मांगे गए?


आदेशों की उलझन से बना विवाद

ABVP ने बताया कि राजभवन द्वारा 23 दिसंबर 2024 को रामलखन खरे को उनके मूल पद पर प्रतिस्थापित किया गया था। इसके बाद 6 अक्टूबर 2025 को छत्तीसगढ़ शासन ने यशवंत केराम को कुलसचिव पद पर नई पदस्थापना दी। वहीं 2 जनवरी 2026 को राज्यपाल द्वारा जारी आदेश में आर.एल. खरे को प्रथम कुलसचिव के आदेशों का निर्माण करने का उल्लेख है, लेकिन उसमें यशवंत केराम को हटाने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है। इसी कारण विश्वविद्यालय में दो कुलसचिवों की स्थिति बनी हुई है।

प्रशासनिक लापरवाही का आरोप

प्रदेश सह मंत्री प्रथम राव फूटाने ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही कई विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां स्थायी कुलपति और कुलसचिव नहीं हैं, लेकिन संभवतः यह देश का पहला विश्वविद्यालय है जहां एक साथ दो कुलसचिव कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए मांग की कि तत्काल यह स्पष्ट किया जाए कि विश्वविद्यालय का वैध कुलसचिव कौन है, ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चल सकें और छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो।

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