
अभिनेत्री स्वरा भास्कर का फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर दिया गया बयान एक बार फिर चर्चा में है। 2018 में फिल्म की रिलीज के बाद उन्होंने निर्देशक संजय लीला भंसाली को खुला खत लिखा था। अब ‘Women Life Freedom’ कार्यक्रम के दौरान स्वरा ने उस पत्र और फिल्म को लेकर अपनी बात स्पष्ट की है।
स्वरा ने कहा कि फिल्म में जौहर को जिस तरह दिखाया गया, उससे वह असहज थीं। उनका मानना है कि इस तरह का चित्रण ऐसे समाज में गलत संदेश दे सकता है, जहां महिलाओं के खिलाफ रेप की घटनाएं पहले से बड़ी समस्या हैं।
‘भगवान न करे मैं रेप पीड़िता होती’
स्वरा ने फिल्म में करीब 800 महिलाओं को जौहर करते हुए दिखाए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसे देखकर उनके मन में सवाल आया कि अगर वह खुद रेप की पीड़िता होतीं, तो फिल्म उन्हें क्या संदेश देती।
अभिनेत्री ने सवाल किया कि क्या किसी महिला के साथ रेप होने का मतलब उसकी जिंदगी का अंत है? उन्होंने कहा कि अगर कोई पीड़िता अपनी जान नहीं देती, तो क्या उसे कायर या कम सम्मान वाली महिला समझा जाना चाहिए?
स्वरा ने इसी संदर्भ में कहा कि वह नहीं चाहतीं कि समाज महिलाओं को ऐसा संदेश दे कि बलात्कार के बाद उनके पास जीने का अधिकार नहीं रह जाता।
गर्भवती महिला के सीन पर भी नाराज हुई थीं
स्वरा ने फिल्म के एक सीन का जिक्र करते हुए बताया कि इसे देखकर वह दर्शकों के बीच ही ‘छी-छी’ कह रही थीं। उनके मुताबिक, इस दृश्य में एक गर्भवती महिला के पेट का क्लोज-अप दिखाया गया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर गर्भ में पल रही बच्ची के साथ भविष्य में किसी मुगल शासक द्वारा रेप किए जाने की आशंका हो, तो क्या सिर्फ इस संभावना के आधार पर उसके जन्म के अधिकार पर सवाल उठाया जाना चाहिए?
2018 में लिखा था भंसाली को खुला खत
‘पद्मावत’ की रिलीज के बाद स्वरा ने संजय लीला भंसाली को खुले खत के जरिए फिल्म में महिलाओं के चित्रण और जौहर को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। अब उसी पुराने विवाद से जुड़ा उनका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फिर बहस छिड़ गई है।
कुछ लोग स्वरा के बयान की आलोचना करते हुए इसे भारतीय परंपरा और जौहर की गलत व्याख्या बता रहे हैं। वहीं, स्वरा का तर्क फिल्म में जौहर के चित्रण और रेप पीड़ित महिलाओं के प्रति समाज के नजरिए से जुड़ा है।
