

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान कानूनी विवाद में घिर गए हैं। उन पर ट्रांसपोर्ट का ठेका दिलाने का झांसा देकर 17.52 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पुलिस को जांच कर अंतिम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता दिनकर विश्वमित्र का आरोप है कि उनकी मुलाकात राजेश चौहान से एक परिचित के माध्यम से हुई थी। राजेश ने कथित तौर पर दावा किया कि उनकी ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन अयस्क और अन्य सामग्री के परिवहन का ठेका मिला है। उन्होंने इस कारोबार में अच्छा मुनाफा होने का भरोसा दिलाकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया।
शिकायत के अनुसार, भरोसा दिलाने के लिए कुछ दस्तावेज और वर्क ऑर्डर भी दिखाए गए। इसके बाद 30 जुलाई 2021 को दोनों के बीच समझौता हुआ और शिकायतकर्ता ने पहले 2.51 लाख रुपये, फिर दो किस्तों में 15.01 लाख रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए।
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता का कहना है कि व्यवसायिक साझेदारी के नाम पर रकम लेकर धोखाधड़ी की गई। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को जांच पूरी कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है।
राजेश चौहान 1990 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के ऑफ स्पिनर रह चुके हैं। उन्होंने भारत के लिए 21 टेस्ट और 35 वनडे मैच खेले हैं तथा टेस्ट क्रिकेट में 47 विकेट अपने नाम किए हैं।





