
बालोद स्थित उप जेल में पदस्थ जेल प्रहरी महेंद्र वर्मा के अचानक से कही गायब हो जाने से हड़कंप मच गया है. लापता होने से पहले उन्होंने कुछ ऐसा हिंट दिया जिससे नई बहस छिड़ गई है…
बालोद: एक वीडियो, स्कूटी की डिक्की और उसमें रखा आठ पन्नों का पत्र… बालोद उप जेल के जेल प्रहरी महेंद्र वर्मा के अचानक गायब होने के बाद सामने आए इन तथ्यों ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। परिजनों के हाथ लगे पत्र में जेल के अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
महेंद्र के लापता होने से पहले उनके भांजे के मोबाइल पर एक वीडियो पहुंचा था। वीडियो में उन्होंने स्कूटी की डिक्की में पत्र रखे होने की जानकारी दी थी। परिजनों ने जब डिक्की खोली तो पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर के नाम लिखा आठ पन्नों का पत्र मिला।
पत्र में महेंद्र ने जेल में एक बंदी से मोबाइल बरामद होने के मामले को लेकर अपनी परेशानी बताई है। उनका आरोप है कि इस घटना की जिम्मेदारी उन पर डाली जा रही थी और कथित तौर पर उन्हें पूरा मामला अपने ऊपर लेने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा।
उन्होंने दुर्ग जेल अधीक्षक मनीष संभाकर समेत कुछ अधिकारियों पर मानसिक तनाव और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। ड्यूटी के दौरान तलाशी लिए जाने का भी उन्होंने जिक्र किया है। महेंद्र ने दावा किया कि 12 अगस्त की शाम तलाशी के दौरान उनके साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किया गया।
परिवार के लिए भी लिखी कई बातें
पत्र में महेंद्र ने अपने दोनों बेटों, पत्नी और माता-पिता को संबोधित किया है। बच्चों को पढ़ाई कर अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की जिम्मेदारी संभालने की बात कही गई है। एक बेटे के कलेक्टर और दूसरे के डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की इच्छा भी पत्र में जाहिर की गई है।
उन्होंने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें बालोद से कहीं और ले जाने और बच्चों का अच्छे स्कूल में दाखिला कराने की अपील की है। साथ ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर की मांग भी की गई है।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
महेंद्र ने अपने पत्र में जेल की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों तक मोबाइल पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने जांच के दौरान जेल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और उनकी जांच कराने की मांग की है।
वीडियो और पत्र सामने आने के बाद परिजन थाने पहुंचे और महेंद्र की गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस उनकी तलाश कर रही है, लेकिन फिलहाल उनका कोई पता नहीं चला है।
बालोद जेल में मोबाइल मिलने का मामला नया नहीं है। दिसंबर 2025 में जिला जेल परिसर से भी एक मोबाइल बरामद किया गया था। हालांकि, महेंद्र वर्मा ने पत्र में जो आरोप लगाए हैं, उनकी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच और महेंद्र के मिलने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।
