
अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाले बिल को प्रतिनिधि सभा की मंजूरी मिलने के बाद भारत ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। भारत ने कहा है कि उसके लिए 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। साथ ही चेतावनी दी कि ऐसे कदमों का असर भारत-अमेरिका संबंधों के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
भारत ने अमेरिका को क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखने की बात कही है। मंत्रालय ने कहा कि भारत अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल कर अपनी जरूरतें पूरी करता रहेगा और बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेगा।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। सरकार के मुताबिक, संभावित फैसलों का असर केवल दोनों देशों के रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार इस मामले में देश के कारोबारी और औद्योगिक समूहों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि किसी भी संभावित असर को कम किया जा सके।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में क्या हुआ?
रूस के साथ व्यापार और ऊर्जा खरीद को लेकर दबाव बढ़ाने वाले इस विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मंजूरी मिल गई है। हालांकि, इसे कानून बनने के लिए अभी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत है।
मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने वोट दिया। वहीं, सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट सांसदों ने इसका विरोध किया।
विधेयक में रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों के अलावा उन जहाजों के कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर कार्रवाई का प्रस्ताव है, जिनके जरिए रूस के तेल पर लगे प्रतिबंधों से बचने की कोशिश की जाती है।
बिल में भारत का भी जिक्र
अमेरिकी सीनेटर जीन शहीन ने रूस के तेल और गैस की खरीद को लेकर चीन और भारत का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रूस अपने ऊर्जा उत्पादों को बेचने के लिए शैडो फ्लीट का इस्तेमाल कर रहा है और उसकी आपूर्ति चीन तथा भारत जैसे देशों तक पहुंच रही है।
सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भी चीन और भारत से रूसी तेल और गैस के दूसरे स्रोत तलाशने की बात कही।
भारत पहले भी साफ कर चुका है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीद के फैसले लेगा। अमेरिका इससे पहले भी रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ और अन्य आर्थिक दबाव डाल चुका है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है।
