
नई दिल्ली। दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों के आकार को लेकर चल रही बहस अब संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘Equal Earth’ प्रोजेक्शन को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। टोगो की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव के समर्थन में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट दिया।
प्रस्ताव के पीछे अफ्रीकी देशों की लंबे समय से चली आ रही मांग है। उनका कहना है कि दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुछ पारंपरिक नक्शे अफ्रीका के वास्तविक आकार को सही तरीके से पेश नहीं करते। इस पहल को अफ्रीकी संघ के सदस्य देशों का भी समर्थन मिला है।
ग्रीनलैंड को देखकर समझिए नक्शे की समस्या
इसका सबसे आसान उदाहरण अफ्रीका और ग्रीनलैंड हैं। सामान्य Mercator projection में दोनों का आकार कई बार करीब-करीब एक जैसा नजर आता है। लेकिन वास्तविकता बिल्कुल अलग है। क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है।
Mercator projection को 16वीं सदी में कार्टोग्राफर गेरार्डस मर्केटर ने विकसित किया था। इसका इस्तेमाल खास तौर पर समुद्री यात्राओं में दिशा तय करने के लिए किया जाता था। पृथ्वी के गोल आकार को सपाट सतह पर दिखाने की वजह से इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के आकार में विकृति आती है।
Equal Earth में क्या बदलेगा?
‘Equal Earth’ प्रोजेक्शन का फोकस महाद्वीपों के क्षेत्रफल को वास्तविक अनुपात के करीब दिखाने पर है। इससे अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दूसरे बड़े भू-भाग नक्शे पर ज्यादा वास्तविक आकार में दिखाई देते हैं।
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने भी इस पहल के दौरान नक्शों के महत्व पर जोर दिया। उनके मुताबिक नक्शे सिर्फ जगहों की जानकारी नहीं देते, बल्कि दुनिया को देखने की हमारी समझ को भी प्रभावित करते हैं।
अमेरिका के विरोध के बावजूद पास हुआ प्रस्ताव
वोटिंग में अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि 164 देशों ने समर्थन किया। सर्बिया, एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
फ्रांस ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि नक्शा बदलने से दुनिया नहीं बदलती, लेकिन दुनिया को गलत तरीके से पेश करने वाली तस्वीर को सुधारना सच्चाई की दिशा में कदम है।
क्या अब पुराने नक्शे पर रोक लगेगी?
ऐसा नहीं है। संयुक्त राष्ट्र का फैसला Mercator projection पर प्रतिबंध नहीं लगाता। यह एक प्रोत्साहन वाला प्रस्ताव है, जिसके जरिए सरकारों और संस्थानों से Equal Earth जैसे प्रोजेक्शन के इस्तेमाल पर विचार करने को कहा गया है।
इसका मतलब है कि अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से Mercator समेत दूसरे नक्शों का इस्तेमाल जारी रह सकता है। लेकिन अफ्रीका के वास्तविक आकार को लेकर उठाई गई मांग को अब संयुक्त राष्ट्र महासभा का व्यापक समर्थन मिल गया है।
