
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व जताया। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस नेता पर तीखा हमला बोला है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने चिदंबरम के बयान को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसी व्यक्ति का नाम लेकर बात नहीं की थी, लेकिन बयान के बाद कुछ लोग खुद ही उस टिप्पणी से अपना संबंध जोड़ रहे हैं।
चिदंबरम ने क्या कहा था?
पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री के इस्तेमाल किए गए शब्द का मतलब उनके लिए ‘दिमागी नक्सल’ होना है, तो उन्हें इस बात पर गर्व है।
चिदंबरम की इस टिप्पणी के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। बीजेपी ने इसे नक्सलवाद और उससे जुड़ी विचारधारा के प्रति कांग्रेस के रुख से जोड़कर निशाना साधा।
सुधांशु त्रिवेदी ने बताई ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा
बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने अपनी प्रतिक्रिया में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को राजनीतिक और वैचारिक संदर्भ में समझाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ऐसे व्यक्तियों और विचारों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं, जिन्हें बीजेपी राष्ट्रविरोधी या हिंसक विचारधाराओं से जुड़ा मानती है।
त्रिवेदी ने अपने बयान में हाफिज सईद, याकूब मेमन, ओसामा बिन लादेन, जाकिर नाइक, इशरत जहां और बुरहान वानी जैसे नामों का जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष के कुछ नेताओं के पुराने बयानों तथा रुख का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि किन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति या संगठन के प्रति सहानुभूति दिखाई गई।
पीएम मोदी ने लाल किले से क्या कहा था?
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई और उसमें मिली सफलता का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने नक्सली विचारधारा के प्रभाव से जुड़े लोगों को लेकर भी चेतावनी दी।
प्रधानमंत्री के इसी बयान में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया। इसके बाद चिदंबरम की प्रतिक्रिया सामने आई और बीजेपी ने पलटवार किया।
BJP ने झीरम घाटी का भी किया जिक्र
सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान के दौरान छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी नक्सली हमले का भी संदर्भ दिया। 25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर CPI (Maoist) के सदस्यों ने हमला किया था। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार इस हमले में 27 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए थे।
हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मारे गए थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और महेंद्र कर्मा समेत कई प्रमुख नेताओं की जान गई थी। घटना के बाद मामले की जांच NIA को सौंपी गई और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई।
‘दिमागी नक्सल’ पर क्यों छिड़ी राजनीतिक बहस?
इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री के नक्सलवाद पर दिए बयान से हुई, लेकिन अब बहस चिदंबरम की प्रतिक्रिया और बीजेपी के पलटवार तक पहुंच गई है। कांग्रेस नेता जहां प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस की नक्सलवाद पर कथित नरम नीति से जोड़ रही है।
