रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन बुधवार को सदन में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा और ऊर्जा रहा है। यह गीत हर दौर में देश को दिशा और शक्ति देता रहा है।
डॉ. रमन सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष पूरे हुए, तब भारत अंग्रेजों की गुलामी में था। इसके 100 वर्ष पूरे होने पर देश ने आपातकाल का दौर देखा। अब जब यह गीत अपने 150 वर्ष पूरे कर रहा है, तब देश में केंद्र की सत्ता में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि आज वंदे मातरम् पर चर्चा इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि भारत एक नए युग की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह दिन विधानसभा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां सभी सदस्य एकजुट होकर नवभारत के निर्माण में अपनी भूमिका तय कर सकते हैं। डॉ. रमन सिंह ने सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे इस गंभीर और ऐतिहासिक विषय पर खुलकर अपने विचार रखें।
वहीं, चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि इस विषय में पंडित जवाहरलाल नेहरू को बार-बार क्यों जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि नेहरू जी ने इस गीत को तोड़ा या वह विभाजन का कारण बने। महंत ने स्पष्ट किया कि नेहरू जी ने देश को एकजुट रखने और नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से पूरी ईमानदारी के साथ वंदे मातरम् की प्रारंभिक पंक्तियों को स्वीकार किया।
चरणदास महंत ने कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यदि आने वाली पीढ़ियों को गलत दिशा दिखाई गई, तो यह देश के लिए उचित नहीं होगा।
