
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध से जुड़े ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। नए कानून से ट्रंप को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।
कानून में भारत और चीन समेत 10 देशों का नाम है। इनमें UAE, तुर्की, सिंगापुर, अजरबैजान, कजाकिस्तान, हंगरी, किर्गिस्तान और स्लोवाकिया भी शामिल हैं। हालांकि, भारत पर अभी 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। इसे लागू करने का फैसला ट्रंप के अधिकार क्षेत्र में है।
इस कानून का मकसद रूस की आर्थिक ताकत पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसके वित्तीय संसाधनों को सीमित करना है। इसमें रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा कंपनियों और रूस का समर्थन करने वाली विदेशी संस्थाओं पर कार्रवाई के प्रावधान हैं। रूस से जुड़े सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी दिया गया है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बिल को 262-159 वोट से मंजूरी दी थी। ट्रंप ने दो दिन बाद इस पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी ट्रंप को मिलने वाली व्यापक टैरिफ शक्तियों पर आपत्ति जताई थी।
भारत ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा है। विदेश मंत्रालय ने रूस के तेल व्यापार को लेकर अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। भारत ने यह भी कहा कि ऐसे फैसलों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
