वो आखिरी मैसेज, जो मैंने कभी पढ़ा ही नहीं…
भाग 1: दोस्ती का झूठा दिखावा मेरे फेसबुक पर 847 दोस्त थे। हर सुबह उठते ही सबसे पहले मैं नीली स्क्रीन पर उंगली फिराता। लाइक्स, कमेंट्स, बधाइयों के ढेर। दुनिया की सबसे खूबसूरत एहसास था—लोगों का ‘देखा जाना’। खासकर वो। तन्वी। प्रोफाइल पिक्चर में हमेशा मुस्कुराती, स्टोरी पर शायरी डालती। हमारी बातचीत का सिलसिला सालों … Read more