
अंबिकापुर। सरगुजा के शिवपुर स्थित कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में छात्राओं के पैदल मार्च के बाद प्रशासन ने अब जवाबदेही तय करनी शुरू कर दी है। 7 सितंबर को छात्राएं अपनी समस्याएं लेकर कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल निकली थीं। मामले को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गंभीरता से लिया, जिसके बाद विद्यालय प्रबंधन पर कार्रवाई हुई है।
सबसे पहले प्रशासन ने विद्यालय के प्राचार्य ओम नारायण श्रीवास्तव को आगामी आदेश तक वहां से हटा दिया है। उन्हें सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय अंबिकापुर में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, स्कूल की पीजीटी अंग्रेजी प्रतीक्षा त्रिपाठी को प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशासन ने केवल पदस्थापना में बदलाव तक मामला सीमित नहीं रखा है। छात्राओं के इस कदम के पीछे विद्यालय की व्यवस्थाओं और उनकी समस्याओं को लेकर जांच समिति गठित की गई है। संयुक्त कलेक्टर सरगुजा की अध्यक्षता वाली समिति पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेगी और स्कूल की व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों की भी जांच करेगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
इधर, छात्रावास की जिम्मेदारी संभाल रहीं आयुषी सोनी से भी प्रशासन ने जवाब मांगा है। उन्हें शासकीय कार्य में लापरवाही और उदासीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
CM ने उठाया था सवाल- बच्चियों को पैदल क्यों निकलना पड़ा?
घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से फोन पर बात की थी। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से चली आ रही बिजली समेत अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई थी।
मुख्यमंत्री का सवाल था कि जब स्कूल में समस्याएं पहले से मौजूद थीं, तो उनका समाधान समय रहते क्यों नहीं किया गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि आदिवासी क्षेत्रों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
