भोजपुरी इंडस्ट्री में इस समय Pawan Singh और उनकी पत्नी Jyoti Singh के तलाक मामले को लेकर हलचल मची हुई है। इसी बीच एक्ट्रेस Akshara Singh का बयान सामने आया है, जिसने पूरे विवाद को और चर्चा में ला दिया है।
‘एलिमनी लेना महिला का अधिकार है’ – अक्षरा सिंह
अक्षरा सिंह ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि अगर कोई पुरुष शादी करता है और अपनी पत्नी को घर लाता है, तो उसकी जिम्मेदारी भी बनती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भरण-पोषण (एलिमनी) लेना एक महिला का अधिकार है।
उन्होंने यह भी कहा कि ज्योति सिंह ने जो कुछ सहा है, उसके बाद “100 करोड़ रुपये भी कम पड़ जाएंगे।” अक्षरा का मानना है कि अगर पत्नी को साथ नहीं रखना है, तो उसे उचित मेंटेनेंस जरूर दिया जाना चाहिए। समाज को भी इस मामले में संवेदनशील भूमिका निभानी चाहिए।
ज्योति सिंह ने कोर्ट में क्या कहा?
11 फरवरी को आरा सिविल कोर्ट के फैमिली कोर्ट में पेश हुईं ज्योति सिंह ने बताया कि उनकी शादी को सात साल हो चुके हैं, लेकिन उन्हें न पति का साथ मिला और न ही नियमित भरण-पोषण।
उन्होंने अदालत में कहा कि हर तारीख पर वह खुद हाजिर होती हैं, जबकि उनके पति कई बार अनुपस्थित रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे सुलह चाहती हैं, लेकिन अगर साथ नहीं रखना है तो 10 करोड़ रुपये मेंटेनेंस दिया जाए। यह कहते हुए वे कोर्ट परिसर में भावुक हो गईं।
पवन सिंह कोर्ट क्यों नहीं पहुंचे?
सुनवाई के दौरान पवन सिंह अदालत में उपस्थित नहीं हुए। उनके वकील ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वीडियो कॉल के जरिए उन्हें अस्पताल के बेड पर दिखाया गया। हालांकि, किस अस्पताल में भर्ती हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिस पर ज्योति पक्ष ने सवाल उठाए।
मेंटेनेंस पर अगली सुनवाई 24 फरवरी को
ज्योति सिंह के वकील विष्णुधर पांडेय के अनुसार, पिछले 4-5 वर्षों से उनकी मुवक्किल को नियमित भरण-पोषण नहीं मिला है। इंटरिम मेंटेनेंस की अर्जी भी अभी लंबित है।
कोर्ट ने फिलहाल पहले सुलह की संभावना तलाशने की बात कही है। इसके बाद मेंटेनेंस और अन्य मांगों पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को तय की गई है।
