

देश के स्कूली पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया है। NCERT ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की किताबों में पहली बार वर्ष 1975 की इमरजेंसी (आपातकाल) को शामिल किया है। अब तक यह विषय मुख्य रूप से 12वीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाया जाता था, लेकिन अब 9वीं के विद्यार्थियों को भी इसके बारे में जानकारी दी जाएगी।
क्यों किया गया बदलाव?
शिक्षा मंत्रालय और NCERT के अनुसार, इसका उद्देश्य छात्रों को कम उम्र में ही भारतीय लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं के महत्व से परिचित कराना है। नए पाठ्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाया जाएगा कि आपातकाल के दौरान देश में क्या परिस्थितियां बनी थीं और लोकतंत्र पर उसका क्या प्रभाव पड़ा था।
छात्र क्या पढ़ेंगे?
नए अध्याय में छात्रों को इमरजेंसी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी, जिनमें शामिल हैं—
25 जून 1975 को आपातकाल लागू होने की पृष्ठभूमि
- तत्कालीन सरकार द्वारा लिए गए फैसले
- मौलिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव
- प्रेस सेंसरशिप और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां
- 1977 में चुनाव और लोकतंत्र की वापसी
फैसले पर शुरू हुई चर्चा
NCERT के इस कदम के बाद शिक्षा और राजनीतिक जगत में बहस तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञ इसे छात्रों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने का अच्छा अवसर मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस विषय को पूरी निष्पक्षता और संतुलन के साथ पढ़ाया जाना चाहिए।
नई किताबें आगामी शैक्षणिक सत्र से CBSE और NCERT आधारित अन्य स्कूलों में लागू की जाएंगी।





