chhattisgarh Naxalites Give Up : छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ में सक्रिय नक्सली संगठन CPI (माओवादी) ने हथियार छोड़ने और शांति वार्ता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संगठन ने सरकार से एक महीने का सीजफायर (युद्धविराम) घोषित करने की मांग की है। साथ ही वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
नक्सलियों का शांति की ओर रुख
CPI (माओवादी) संगठन के केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय ने प्रेस नोट जारी कर ऐलान किया कि संगठन अब विकास और शांति चाहता है। उन्होंने बताया कि वे अस्थायी रूप से हथियारबंद संघर्ष बंद कर राजनीतिक दलों व संघर्षरत संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। इसके अलावा जेल में बंद साथियों से बातचीत की अनुमति देने और पुलिस कार्रवाइयों पर रोक की भी मांग की गई है।
केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य घोषित कर रखा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस वायरल पत्र की प्रामाणिकता की जांच करने पर जोर दिया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि शांति वार्ता तभी संभव है, जब नक्सली पहले हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें।
आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति
अप्रैल 2025 में लागू हुई छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पुनर्वास एवं राहत नीति-2025 के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सुरक्षा, रोजगार, प्रशिक्षण और 120 दिनों में पुनर्वास की गारंटी दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने का आह्वान किया है।
नक्सली रणनीति या सच्चा मनोबल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शांति प्रस्ताव नक्सलियों की रणनीति भी हो सकती है, जिससे वे समय खींच सकें। वहीं, सरकार की सख्त नीति और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने नक्सलियों पर दबाव बढ़ा दिया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नक्सल अभियानों में हस्तक्षेप से भी इनकार किया था, जिससे सरकार का मनोबल बढ़ा है।
