Chaitra Navratri 2026: सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व माना जाता है। इस पावन समय में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखकर सुख-शांति की कामना करते हैं। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सच्चे मन से की गई साधना जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।
नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत जलाना बेहद शुभ माना जाता है। यह ज्योत पूरे नौ दिनों तक बिना बुझी जलती रहनी चाहिए। कहा जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन इसे जलाने के कुछ जरूरी नियम होते हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी है।
अखंड ज्योत के लिए जरूरी सामग्री
पीतल का दीपक
शुद्ध देसी घी
लंबी और मोटी बत्ती
अक्षत या गेहूं
अखंड ज्योत जलाने की सही विधि
सबसे पहले सुबह स्नान कर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर चावल या गेहूं से स्वास्तिक बनाएं। स्वास्तिक के ऊपर दीपक रखें।
वास्तु के अनुसार दीपक को घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। अब दीपक में बत्ती रखें, उसमें घी डालें और मां दुर्गा का ध्यान करते हुए अखंड ज्योत प्रज्वलित करें।
इन बातों का विशेष ध्यान रखें
अखंड ज्योत जलाने के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है:
दीपक में समय-समय पर घी डालते रहें ताकि ज्योत न बुझे
ज्योत के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें
मन में किसी के प्रति बुरा विचार न लाएं
घर में वाद-विवाद से बचें
जिस घर में अखंड ज्योत जल रही हो, वहां ताला लगाकर बाहर न जाएं
पूजा करने वाला व्यक्ति लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन न करे
दीपक के पास कोई नुकीली या अशुभ वस्तु न रखें
अगर अखंड ज्योत बुझ जाए तो क्या करें
अगर किसी कारण से ज्योत बुझ जाए तो घबराएं नहीं। तुरंत उसे दोबारा जलाएं और मां दुर्गा से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें। सच्चे मन से की गई प्रार्थना से दोष समाप्त हो जाता है।
नवरात्र समाप्त होने पर क्या करें
चैत्र नवरात्र के समापन के बाद अखंड ज्योत में उपयोग की गई सामग्री को किसी पवित्र नदी या जल में प्रवाहित कर दें। इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है।
अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। इसे अंतिम सत्य न मानें और अपने विवेक से काम लें।
