रायपुर:छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में CBI जांच के बीच एक सरकारी गवाह के बयान ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। गवाह के अनुसार, 2021-22 की CGPSC परीक्षा में चयन सुनिश्चित कराने के लिए 50 से 60 लाख रुपये तक की डील की गई थी, जिसमें प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के रसूख का खुला इस्तेमाल हुआ।
इन खुलासों के बाद यह मामला सिर्फ भर्ती घोटाले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ धोखा माना जा रहा है।
60 लाख में पास कराने की डील, OSD और रसूखदारों का नाम इस्तेमाल
सरकारी गवाह के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर ने अपने प्रभावशाली रिश्तों का हवाला देकर अभ्यर्थियों से 50 से 60 लाख रुपये की मांग की थी।
दावा है कि इस “डील” में तत्कालीन OSD और ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों के नाम का उल्लेख किया गया, ताकि अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया जा सके कि चयन तय है।
गवाह का कहना है कि रकम तय होते ही पूरी प्रक्रिया को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
सिद्धिविनायक मैरिज पैलेस में रातभर रटे गए सवाल
गवाह के बयान के मुताबिक, 12 फरवरी 2022, यानी परीक्षा से ठीक एक दिन पहले, रायपुर के सिद्धिविनायक मैरिज पैलेस में कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को प्रिंटेड प्रश्नपत्र रटवाए गए।
पूरी रात सवाल याद कराए गए और इसके बाद उन्हीं उम्मीदवारों का प्रीलिम्स में चयन हुआ।
गवाह के अनुसार जिन नामों का उल्लेख हुआ, उनमें शामिल हैं—
रितेश चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, समीर चंद्राकर, माधुरी साहू, प्रवीण कुमार प्रसाद, सत्येंद्र सिंह ठाकुर, पुल्कीत साहू और भारती वर्मा।
मेन्स परीक्षा के लिए रिसॉर्ट में ‘सीक्रेट क्लास’
भ्रष्टाचार का यह खेल सिर्फ प्रीलिम्स तक सीमित नहीं रहा।
गवाह ने दावा किया कि मेन्स परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को बारनवापारा के एक रिसॉर्ट में फर्जी नामों से ठहराया गया।
इस दौरान कड़ी निगरानी में विशेष तैयारी कराई गई।
बताए गए नामों में शामिल हैं—
ऋचा कौर, ज्योति सूर्यवंशी, दिव्यानी तिवारी, योगेश देवांगन, कृति सिंह, मनीष, निकिता, प्रतीक, विनोद सिंह, निवेदिता राजपूत, शास्वत सोनी, कवीश सिन्हा, सुषमा अग्रवाल, अर्चना, पूजा, भवानी पैंकरा, शशांक मिश्रा, निधि, पेमेन्द्र चंद्राकर, प्रकाश चंद्राकर समेत अन्य।
शिक्षकों को बुलाकर पेपर हल करवाने का आरोप
सरकारी गवाह ने यह भी दावा किया कि रिसॉर्ट में पेपर हल कराने के लिए शिक्षकों को बुलाया गया।
बताए जा रहे नामों में धर्मेंद्र साहू और परितोष शामिल हैं।
अगर ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह पूरे चयन तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
CBI चार्जशीट में भी बड़े नाम, जांच तेज
सूत्रों के मुताबिक, CBI की चार्जशीट में तत्कालीन चेयरमैन, सचिव और कई प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों का उल्लेख है।
आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और कुछ चयन सिफारिश व सेटिंग के आधार पर किए गए।
CBI ने इस मामले में अब कार्रवाई तेज कर दी है।
मेहनती युवाओं के साथ ‘क्रूर मजाक’
यह पूरा मामला उन हजारों युवाओं के लिए सबसे बड़ा झटका है, जिन्होंने सालों की मेहनत, सीमित संसाधनों और ईमानदारी से तैयारी की।
अब सवाल उठ रहा है—
क्या चयन योग्यता से हुआ या मैरिज पैलेस और रिसॉर्ट में तय किया गया?
29 अयोग्य अभ्यर्थी प्रीलिम्स में पास?
सूत्रों के अनुसार, 29 ऐसे अभ्यर्थी प्रीलिम्स में पास हो गए, जिन्हें योग्य नहीं माना जा रहा था।
हालांकि, मेन्स में फंड ऊपर तक नहीं पहुंचने के कारण उनका चयन आगे नहीं बढ़ पाया।
छात्र संगठनों की ओर से इन 29 मामलों की EOW या अन्य जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की तैयारी चल रही है।
