
नेपाल-चीन सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान पांचवें दिन भी जारी है। बचाव दल मलबे और गाद में फंसे लोगों को तलाश रहे हैं। हादसे में अब तक 691 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग लापता हैं।
नेपाल में 675 मौतें और 2,498 लोग लापता बताए गए हैं। वहीं, तिब्बत के ग्यिरोंग में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग अब भी लापता हैं।
11 जलविद्युत परियोजनाओं के 898 कर्मचारी लापता
नेपाल की 11 अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 898 कर्मचारी लापता हैं। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। अब तक 361 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
सबसे ज्यादा लोग अपर त्रिशूली-1 में लापता हैं। यहां कम से कम 322 कर्मचारी लापता बताए गए हैं। इसके अलावा अपर त्रिशूली-3B में 122, अपर त्रिशूली-3A में 43 और रसुवागढ़ी परियोजना में 44 लोग लापता हैं।
ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ के अनुसार, त्रिशूली-3A की सुरंग में बचाव अभियान के दौरान कुछ सफलता मिली है।
भारत ने भेजी विशेषज्ञ टीम
भारत ने नेपाल के लिए तीसरी राहत उड़ान भेजी, जिसमें 11 सदस्यीय चिकित्सा और सुरंग विशेषज्ञों की टीम शामिल थी। भारतीय दूतावास के मुताबिक, टीम ने प्रभावित जलविद्युत सुरंगों का निरीक्षण किया और बचाव अभियान में मदद की।
भारत से आज चौथी राहत उड़ान भी काठमांडू के लिए रवाना होने की जानकारी दी गई है।
इंजीनियर ने बताया कैसे बची जान
अपर त्रिशूली-1 परियोजना में काम करने वाले इंजीनियर अजय चौधरी भी सुरक्षित निकलने वालों में शामिल हैं। उनके मुताबिक, पानी की तेज लहर देखकर मजदूर पहाड़ियों की ओर भागे। करीब 40 सेकंड में वे सुरक्षित जगह पहुंच गए, लेकिन कई मजदूर पीछे रह गए।
उन्होंने बताया कि करीब 150 से 200 मजदूर बाहर नहीं निकल सके। सुरंग का रास्ता बंद हो गया और उसकी दीवारें भी गिर गईं। सुरंग में नेपाल, भारत, चीन और जर्मनी के लोग मौजूद थे।
15 हेलीकॉप्टरों से जारी है रेस्क्यू
नेपाल सेना ने बचाव अभियान में 15 हेलीकॉप्टर और कम से कम 84 प्रशिक्षित कर्मी लगाए हैं। बड़ी संख्या में अन्य बचावकर्मी भी अभियान में जुटे हैं। एक चीनी कंपनी के भी राहत कार्य में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल ने सुरंगों में बचाव, जीवित लोगों का पता लगाने, फोरेंसिक पहचान और DNA जांच के लिए पड़ोसी देशों से तकनीकी मदद मांगी है।
स्टारलिंक ने भी मदद की पेशकश
एलन मस्क की कंपनी Starlink ने भी नेपाल को
मदद देने की पेशकश की है। कंपनी का कहना है कि सरकारी मंजूरी मिलने के बाद वह नेपाली सरकार और राहत संगठनों को मुफ्त सैटेलाइट इंटरनेट सेवा दे सकती है।
बाढ़ में सड़कें, पुल और मोबाइल नेटवर्क प्रभावित होने के कारण सैटेलाइट कनेक्शन बचाव दलों के बीच संपर्क और लापता लोगों की तलाश में मददगार हो सकता है।
