
Trump Venezuela oil agreement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ एक बड़े तेल समझौते का दावा किया है। ट्रंप ने इसे दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील बताया। उनका कहना है कि इस समझौते से अमेरिका को वेनेजुएला के बड़े तेल भंडार तक पहुंच मिलेगी और देश में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ सकती है।
ट्रंप के मुताबिक, तेल की सप्लाई बढ़ने से आने वाले समय में अमेरिका में पेट्रोल और गैस की कीमतें कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते से अमेरिका के तेल भंडार में बड़ी बढ़ोतरी होगी।
ट्रंप ने क्या दावा किया?
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बताया कि अमेरिकी सरकार और निजी कंपनियों ने वेनेजुएला के साथ मिलकर वहां मौजूद 65 अरब बैरल से ज्यादा प्रमाणित तेल भंडार पर बड़े स्तर पर नियंत्रण हासिल किया है।
उन्होंने दावा किया कि इस समझौते में अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा इस्तेमाल नहीं किया गया। ट्रंप ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध सचिव पीट हेगसेथ की भूमिका का भी जिक्र किया।
इसे सबसे बड़ी डील क्यों बताया?
ट्रंप ने इस समझौते को इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील बताया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका में ईंधन की कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।
ईरान से जुड़े युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल कर चुका है, जिससे उसके भंडार में भी कमी आई है।
वेनेजुएला के पास कितना तेल है?
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है।
इसके बावजूद वेनेजुएला अपनी क्षमता के मुकाबले काफी कम तेल उत्पादन करता है। इसकी बड़ी वजह लंबे समय से खराब बुनियादी ढांचा, तेल उद्योग में निवेश की कमी और दूसरी आर्थिक समस्याएं हैं।
ट्रंप और वेनेजुएला का तेल विवाद
ट्रंप लंबे समय से चाहते रहे हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में दोबारा काम करें। उनका आरोप है कि वेनेजुएला ने पहले अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था।
अब नए समझौते के जरिए अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ट्रंप की ओर से किए गए इस बड़े दावे के बाद इस समझौते की वास्तविक शर्तों और इसके लागू होने की स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।
