मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने स्वामी Avimukteshwaranand विवाद पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि “हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।”
क्या बोले सीएम?
सीएम ने कहा कि किसी भी पद की गरिमा नियम और परंपरा से तय होती है। जैसे कोई भी खुद को मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं कह सकता, वैसे ही शंकराचार्य बनने की भी तय प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि विद्वत परिषद की मान्यता के बिना कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता।
चार पीठों का जिक्र
सीएम ने बताया कि Adi Shankaracharya ने देश की चार दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी—
उत्तर में ज्योतिष पीठ
दक्षिण में श्रृंगेरी
पूर्व में जगन्नाथपुरी
पश्चिम में द्वारिकापुरी
इन पीठों की परंपरा वेदों—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—से जुड़ी है और आज भी तय मानकों के अनुसार संचालित होती है।
माघ मेले का मुद्दा
सीएम ने कहा कि मौनी अमावस्या पर Magh Mela में 4.50 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति नियम तोड़कर प्रवेश करता, तो भगदड़ मच सकती थी और लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
सपा पर आरोप
सीएम ने Samajwadi Party पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संबंधित व्यक्ति शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई?
आस्था और विकास साथ-साथ
सीएम ने कहा कि उनकी सरकार में आस्था और विकास दोनों साथ चल रहे हैं।
उन्होंने Ram Mandir, Kashi Vishwanath Dham और मथुरा-वृंदावन के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि “सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता।”
साथ ही उन्होंने कहा कि दीपोत्सव और रंगोत्सव जैसे आयोजन प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
