लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि जब तक विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वह सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे और कुर्सी से दूर रहेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओम बिरला ने यह कदम विपक्ष को संदेश देने और नैतिक जिम्मेदारी के तहत उठाया है। हालांकि, संसदीय नियमों में स्पीकर के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने नोटिस पर बिना देरी के विचार करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
बजट सत्र के दूसरे चरण में आ सकता है प्रस्ताव
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के 118 सांसदों ने लोकसभा महासचिव को स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। इसके बाद ओम बिरला ने नोटिस की जांच कर जल्द प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
जानकारी के मुताबिक, स्पीकर को हटाने से जुड़ा यह प्रस्ताव संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश किया जा सकता है। बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा।
नियम क्या कहते हैं?
संविधान के अनुच्छेद 96(1) के अनुसार, यदि लोकसभा में स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है, तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में किसी अन्य नेता को सदन की कार्यवाही की जिम्मेदारी दी जाती है।
हालांकि, इस दौरान स्पीकर सदन में मौजूद रह सकते हैं, बहस में हिस्सा ले सकते हैं और अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब भी दे सकते हैं।
क्यों लाया गया अविश्वास प्रस्ताव?
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला सदन की कार्यवाही में भेदभाव करते हैं। विपक्ष का कहना है कि सत्तापक्ष को ज्यादा मौके दिए जाते हैं, जबकि विपक्ष की बातों को रोका जाता है।
आरोप है कि स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने का मौका नहीं दिया। साथ ही महिला सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाए गए आरोपों पर कार्रवाई की गई, जबकि भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने से नहीं रोका गया। इसके अलावा, 8 सांसदों के निलंबन को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।
