​              Bihar BPSC exam पास कर सरपंच से बने टीचर,अब राजनीति छोड़,बच्चो का संवारेंगे भविष्य..
   
 

Bihar BPSC exam पास कर सरपंच से बने टीचर,अब राजनीति छोड़,बच्चो का संवारेंगे भविष्य..

Mkyadu
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बिहार के सुपौल जिले के भगवानपुर ग्राम पंचायत के सरपंच देवेंद्र दास (Devendra Das) ने कठिन परिश्रम कर Bihar BPSC exam पास कर लिया है,जिसके बाद अब वे सरपंच पद से इस्तीफा देकर शिक्षक का पद संभालेंगे…

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हालही में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) TRE 2.0 का एग्जाम मुखिया ने पास कर लिया है। जिसके बाद अब सरपंच देवेंद्र दास 10+2  के शिक्षक बन गए हैं।

शुरू से ही सामाजिक कार्यों में मुखिया Devendra Das की रुचि रही है।अपनी पढ़ाई के दौरान ही वे गांव में बच्चों को भी पढ़ाते थे, गांव के विकास और उनके समर्पण को देखते हुए पहले उन्हें पंचायत समिति फिर ग्राम पंचायत के सरपंच के पद पर भारी मतों से उन्हें विजयी बनाया गया। सभी ग्रामीण भी देवेन्द्र दास के शिक्षक बनने पर काफी खुश हैं।

ग्राम पंचायत में सरपंच का पद काफी अहम होता है,जिसे जितने के लिए लोग लाखों तक खर्च करते हैं और फिर सरपंच बनते हैं। लेकिन सरपंच के पद पर Devendra का अभी तीन साल का कार्यकाल और शेष है इसके बाद भी उन्होंने इस्तीफा देकर शिक्षक बनने का निर्णय लिया है।

देवेंद्र ने बताया कि शिक्षा की बदहाली की वजह से ही उन्होंने ये फैसला लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत समिति के सदस्य और मुखिया के तौर पर जब वे स्कूलों के निरीक्षण करते थे, तब शिक्षा की बदहाली स्थिति को देखकर उन्हें दुख होता था। शिक्षा की इसी खराब स्थिति को देखकर हमने टीचर बनकर सब को शिक्षित करने का संकल्प किया था।

अधिकारी को सौंपेंगे इस्तीफा

देवेंद्र का चयन पॉलिटिकल साइंस संकाय में इंटर स्तरीय माध्यमिक विद्यालय में हुआ है। Devendra Das को सुपौल के गांधी मैदान में जिला प्रशासन के द्वारा शनिवार 13 जनवरी को अपना नियुक्ति पत्र मिला है। जिसके बाद सहर्ष जिला पंचायती राज पदाधिकारी को देवेन्द्र दास  अपने सरपंच का पद छोड़ने हेतु इस्तीफा सौंपेंगे।

देवेंद्र दास ने मिथिला यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई

वर्ष 2015 में देवेंद्र दास ने बीएड किया था।फिर पॉलिटिकल साइंस में उन्होंने एलएन मिथिला यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री ली। अपनी पढ़ाई के वक्त ही उन्होंने गांव के एक स्कूल में प्राइवेट टीचर के तौर  पर पढ़ाना शुरू किया। उसी बीच राजनीति में किस्मत आजमाकर वे सफल हुए और गांव की सेवा करने का काम संभाला। अब शिक्षा के क्षेत्र में वे बच्चों का भाग्य सुधारेंगे।

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